AwarenessEducation

शिक्षा में कमाई का मायाजाल, अभिभावक बेहाल

– मार्च-अप्रेल में अपनी कमाई का 60 से 80 प्रतिशत तक अपने बच्चे की शिक्षा में दे रहे हैं पैरेंट्स
– बड़े स्कूल नर्सरी में एडमिशन को लेकर करते हैं मनमान

 

आपने सुना इस बार चींटू के स्कूल की फीस बढ़ गई है। अभी सिक्स्थ क्लास में ही यह हाल है, तो हायर क्लासेज में क्या होगा। कल मैं स्कूल जाकर नई फीस पता करके आई हूं। स्कूल वालों ने 20 फीसदी तक फीस बढ़ा दी है। किताबों और यूनिफार्म का खर्चा भी बढ़ गया है।एक मां की यह चिंता इस समय घर-घर की कहानी बनी हुई है। स्कूलों की फीस बढ़ोतरी की मनमानी का आलम यह है कि पैरेंट्स का मार्च और अप्रेल का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। पैरेंट्स को अपनी कमाई का 80 फीसदी तक बच्चों की एजुकेशन में देना पड़ रहा है। दो बच्चों की तीन महीने की फीस और दूसरे खर्चों को मिलाकर करीब 40 हजार रुपए तक खर्चा आ रहा है, ऐसे में एवरेज इंकम वाले पैरेंट्स इस समय कितनी बड़ी परेशानी में है, इसका अंदाजा साफ तौर पर लगाया जा सकता है।

पूरे देश के हाल बेहाल

ये हाल पूरे देश का है। निजी स्कूलों ने फीस बढ़ोतरी करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। पिछले साल ही यूपी में स्कूलों में बढ़ती फीस के नियंत्रण करने के लिए स्ववित्तपोषित स्वत्रंत विद्यालय विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी गई थी। बावजूद इसके न सिर्फ यूपी में निजी स्कूलों की मनमानी बदस्तूर जारी है, बल्कि पूरे देश में पैरेंट्स विरोध भी जता रहे हैं। पिछले दिनों देश की राजधानी में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ पैरेंट्स सड़कों पर उतर आए थे। पैरेंट्स बढ़ी हुई फीस का विरोध कर रहे थे। पैरेंट्स ने शिक्षा विभाग को एक पत्र भी सौंपा था, जिसमें स्कूलों की मनमानी फीस पर अंकुश लगाने की बात की गई थी। इस विरोध में सामने आया था कि बच्चों की फीस 2800 रुपए से बढ़ाकर 5500 रुपए तक पहुंच गई थी।

प्री-स्कूल में 18 महीने के बच्चे का एडमिशन 

देशभर में ऐसे प्री-प्राइमरी स्कूल तेजी से खुल रहे हैं, जो एक साल के बच्चे का एडमिशन लेने के लिए तैयार है। यहां तक की 18 महीने के बच्चे का एडमिशन तो अब औसत होता जा रहा है। जबकि ढाई से तीन साल के बच्चों का एडमिशन उनकी उम्र मुताबिक सही माना जाता है। हैरानी इस बात की भी है कि शुरुआती क्लासेज में ही बच्चों की फीस आसानी से एक लाख रुपए तक पहुंच जाती है। यही वजह है कि देशभर में प्री-प्राइमरी स्कूलों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।

ऐसे चलता है स्कूलों में व्यवसाय का खेल

– एक ही क्लास में 56 से 60 बच्चे
– एक्टिविटी फंड और आईटी के नाम पर अलग से फीस
– बच्चों से पूरी फीस लेते हैं, जबकि टीचर्स को वेतन आयोग के फायदें नहीं मिलते
– किताबें और स्टेशनरी सामान्य रूप से होती है काफी महंगी
– 18 महीने से छोटे बच्चों के एडमिशन का चल रहा है खेल
– पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते स्कूल बस व ऑटो का किराया भी बढ़ता है हर साल

Comment here