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बेईमान व्यापारी इस हद तक करते हैं मिलावट

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आम आदमी के स्वास्थ्य के लिए खतरा बनी खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट से बचने के लिए जानिए बेईमान व्यापारियों द्वारा अपनाए जाने वाले मिलावट के सामान्य तरीके :

खाद्य पदर्थों में की जा रही मिलावट जहां उपभोक्ताओं के लिए हानिकारक होती है, वहीं यह मिलावट करने वाले व्यापारियों की ओछी मानसिकता को भी दर्शाती है। मात्र अपने लाभ के लिए कुछ लोग उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाते है। मिलावट करने वाले बेईमान प्रकृति के व्यापारियों के विरुद्ध कार्रवाई हेतु वैसे तो कई कानून बने हुए है और सूचना मिलने पर इनके विरुद्ध पुृलिस द्वारा कार्रवाई की भी जाती है परन्तु फिर भी उपभोक्ताओं को मिलावट के प्रति सतर्क रहना चाहिये। यहां मिलावट के सामान्य तरीके बताए जा रहे हैं जो बेईमान व्यापारियों द्वारा अपनाये जाते हैं ताकि उपभोक्ता इस जानकारी के सहारे सतर्क रह सकें और खाद्य पदार्थ में मिलावट पाये जाने पर सम्बन्धित विभाग और अधिकारी को इसकी शिकायत कर सकें। ताकि मिलावट करने वाले के विरुद्ध कार्रवाई संभव हो सके।

मिलावट का अर्थ :
शुद्ध और प्राकृतिक खाद्य पदार्थ में जब कोई घटिया गुणवत्ता या नकली वस्तु का मिश्रण किया जाता है तो इसे मिलावट का नाम दिया जाता है। कई खाद्य पदार्थों में मिलावट की जाती है। इन पदार्थों को निम्र मुख्य वर्गों में बांटा जा सकता है :-
1. दूध और दूग्ध उत्पाद – पहले स्थान पर स्वयं दूध में फिर इससे निर्मित होने वाले उत्पादों जैसे घी, मक्खन, छेना, पनीर, चीज, दही, आइसक्रीम, खोआ, क्रीम और दूध से निर्मित होने वाली मिठाईयों में मिलावट हो सकती है।
2. दूसरे स्थान पर खाद्य तेल वनस्पतिक तेल, हाइड्रोजिनेटेड वनस्पतिक तेल अर्थात्ï वनपतिक घी।
3. सभी प्रकार के मसाले और चटनियां।
4. अनाज और दालें।
5. मांस और मछली से बने उत्पाद।
6. चीनी, शहद, मीठे उत्पाद जैसे मिठाईयां और मीठी गोलियां और टॉफियां आदि।
7. फलों से निर्मित उत्पाद जैसे जैम, मुरब्बे, जैली, फू्रट जूस, पेय तथा मादक पेय पदार्थ आदि।
8. पेय पदार्थ बनाने के पाउडर और तैयार पेय पदार्थ।
9. अन्य वस्तुएं जैसे मिनरल वॉटर, बोतल बंद पेयजल, चॉकलेटï्स आदि।

1. दूध और दूग्ध उत्पाद :
राघव बताते है कि लगभग 40 लाख लीटर दूध दिल्ली में प्रतिदिन उपयोग किया जाता है और ये मांग दीवाली पर लगभग पांच गुणा बढ़ जाती है। वैसे भी दूध और दुग्ध उत्पाद हमारे आहार का एक अहम हिस्सा है। दूध और दुग्ध उत्पादों में आमतौर से निम्र पदार्थो की मिलावट की जाती है जिसके प्रति उपभोक्ताओं को सावधान
रहने की जरूरत है।

दूध में मिलावट :
पानी :- सदियों से दूध बेचने वाले दूध की मात्रा को बढ़ाने के लिए उसमें पानी की मिलावट करते आ रहे हैं जिससे दूध में वसा का अनुपात गिर जाता है। इसी प्रकार अन्य ठोस पदार्थ एस.एन.एफ. और दूसरे आवश्यक तत्व भी घट जाते हैं। कह सकते है कि दूध में पानी की मिलावट से प्राकृतिक दूध की गुणवत्ता गिर जाती है।

दूध का पाउडर और सप्रेटा दूध पाउडर : जब दूध की आमद घट जाती है तब दूध के पाउडर को पानी मेंं घोलकर दूध में मिला लिया जाता है जिसमें दूध की प्राकृतिक गुणवत्ता कम रहती है। आम तौर से दूध का पाउडर क्रीम निकले दूध सप्रेटा से ही बनाया जाता है।

क्रीम निकालना :- आम तौर से दूध के वितरण से पूर्व मशीनों की सहायता से दूध में से क्रीम निकाल ली जाती है जिससे दूध में वसा की मात्रा कम हो जाती है ।

यूरिया का मिश्रण:- नकली दूध का निर्माण करने के लिए उसमें यूरिया का मिश्रण कर दिया जाता है जिससे दूध में ठोस भाग अर्थात एस.एन.एफ. भाग बढ़ जाता है। नकली दूध बनाने में यूरिया का मिश्रण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

उदासिनित्र की मिलावट:- दूध में खटास उत्पन्न होने की प्रक्रिया को मंदा करने के लिए दूधिये अक्सर दूध में खाने का सोडा मिला देते हैं। आमतौर से ऐसा तब किया जाता है जब दूध को दूर किसी क्षेत्र में वितरण के लिए ले जाया जाता है।

डिटर्जेन्ट की मिलावट :- नकली दूध बनाने में डिटर्जेन्ट एक मूल अवयव है जो दूध को कोलाइडीय तंत्र प्रदान करता हैै।

चीनी का मिश्रण :- पानी मिले दूध में थोडी चीनी मिलाने से दूध का स्वाद मीठा हो जाता है और उसका सापेक्षिक घनत्व और ठोस पदार्थों की उपस्थिति बढ़ जाती है।

फार्मेल्डीहाइड की मिलावट :- इसकी मिलावट परिरक्षक का काम करता है और दूध को जल्दी खट्टïा होने से रोकती है परन्तु इसकी मिलावट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

ऑक्सिटोसिन इंजेक्शन :- दूध देने वाले जानवरों को ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन लगाने से ये जन्तु अपने दूध को रोक पाने की क्षमता खो बैठते है और दूधिये जानवर का पूरा दूध निकाल पाने में सफल हो जाते हैं परन्तु ऑक्सीटोसिन निथर कर दूध में मिल जाता है जो बच्चों की वृद्धि की दृष्टिï से बहुत हानिकारक होता है।

अन्य दुग्ध उत्पादों में मिलावट :
घी :- शुद्ध देशी घी में वनस्पतिक घी की मिलावट आम बात है क्योंकि वनस्पतिक घी काफी सस्ता होता है। यह मिलावट अधिक चौंकाने वाली इसलिए है क्योंकि कई वनस्पतिक घी बनाने वाले तिल के तेल का प्रयोग नहीं करते जिससे देशी घी में मिलावट का पता लगाने के लिए किया जाने वाला बोडीन परीक्षण इस मिलावट को पकड नहीं पाता।

खोआ :- खोए में आमतौर से उसका वजन बढ़ाने की दृष्टिï से उसमें सप्रेटा दूध का पाउडर और वनस्पति घी की मिलावट की जाती है। ये मिलावट त्यौहारी मौसम में अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाती है।

पनीर :- पनीर बनाने में अक्सर सप्रेटा दूध इस्तेमाल होता है जिसमें वसा बहुत कम होती है। नकली दूध का भी इस्तेमाल किया जाता है।

आइसक्रीम :- आइसक्रीम निर्माता अपने उत्पाद को आइसक्रीम न कहकर डैजर्ट का नाम दे देते है जिसकी वजह से वे पीएफए द्वारा निर्धारित सीमाओं से बच निकलते है परन्तु दुकानदार और विक्रेता इसे उपभोक्ताओं को आइसक्रीम बताकर ही बेचते है। कम वसा वाले दूध और कृत्रिम मिठास की मिलावट अधिक मात्रा में रंगों की मिलावट आइसक्रीम को कम गुणवत्ता का बनानी है आइसक्रीम में हल्की क्वालिटी के मेवे और निर्माण में सफाई की कमी के कारण सूक्ष्मजीवियों की अधिकता उत्पाद को असुरक्षित बनाती है।

क्रीम :- दूध से निकलने वाली क्रीम में सरस जिलैटिन और विस्कोजैन की मिलावट देखने में क्रीम को गाढ़ापन प्रदान करते हैं और उसका वजन बढा देते हैं।

2. तेल वनस्पतिक तेल और हाइड्रोजिनेटेड तेल :
खाद्य तेलों में आमतौर से सस्ते तेलों की मिलावट की जाती है जो कभी-कभी विषैले भी होते हैं। इन सस्ते तेलों की मिलावट छिपाने की दृष्टिï से अच्छे तेलों की गंध उनमें मिला दी जाती है। आमतौर से खाद्य तेलों में निम्र प्रकार के तेलों की मिलावट की जाती है :

आर्जीमोन या सत्यानाशी का तेल :- मुख्य रूप से इसकी मिलावट सरसों के तेल में की जाती है जबकि अन्य तेलों में भी इसकी मिलावट होती है।

चावल की भूसी का तेल :- इसकी मिलावट मुख्य रूप से सरसों के तेल में की जाती है।

खनिज तेल :- किसी भी तेल मे इसको मिलाया जा सकता है ।

अरंडी का तेल :- इसकी मिलावट किसी भी तेल में की जा सकती है।

अलसी का तेल :- यह भी किसी अन्य तेल में मिलाया जाता है।

ईथाइल आईसोथियोस्यानेट :- इसकी मिलावट नकली सरसों के तेल को बनाने में की जाती है। तेल में सरसों की गंध उत्पन्न करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। कम गुुणवत्ता के सरसों के तेल में तेल की गंध को उन्नत करने के लिए इसे मिलाया जाता है।

मछली का तेल :- मछली के तेल की मिलावट भी की जाती है जो शाकाहारी लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ के समान है।

रूई के बीजों का तेल :- यह भी किसी भी अन्य तेल में मिलाया जा सकता है।

बीएचए या बीएचटी या एन प्रोपिलगैलेट की मिलावट :
ऐसे एन्टी ऑक्सिडैन्टस की उच्च मात्रा मिलाने से तेल की शैल्फ लाइफ बढ़ जाती है।

रैनसिड ऑयल :- रैनसिड ऑयल बदबूदार होता है। खाना पकाने में इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं होता। अत: इसकी मिलावट भी उपयुक्त नहीं है।

उच्च सॉल्वेट मात्रा :- खाद्य तेलों कोरिफाइन्ड करने में सॉल्वेंट्ïस की उच्च मात्रा का उपयोग नियंत्रण की कमी की दशा में हो सकता है जो उपयुक्त नहीं क्योंकि यदि ये तेलों में से पूरी तरह वापस नहीं निकल पाते तो स्वास्थ्य की दृष्टिï से अहितकर होते है।

3. मसाले और चटनियां :
बिना मसालों और चटनियों के भारतीय भोजन पूर्ण नहीं माना जाता। चूकिं ये मसाले और चटनियां महंगे होते हैं इसलिए इनमें मिलावट की संभावनाएं अधिक होती है अत: उपभोक्ता को इनके मामले में अधिक चौकन्ना रहने की आवश्यकता है।

हल्दी :- यह कीड़ों द्वारा खाई हो सकती है जो इसकी गुणवत्ता को कम कर देती है। कम गुणवत्ता की हल्दी में अक्सर मैटानिल मैलों या दूसरे कृत्रिम रंगों की मिलावट हो सकती है। दूसरे हल्दी में स्टार्च पाडउर मिलाकर मैटानिल येलो या दूसरे कृत्रिम रंगों का उपयोग किया जाता है जो हल्दी को मिलावटी बना देते हैं।

लाल मिर्च पाउडर :- लाल मिर्च पाउडर में रंगा हुआ लकड़ी का बुरादा या चोकर मिला दिया जाता है रंगने के लिए तेल में घुलने वाले रतनजोत और सूडान रैड का इस्तेमाल भी किया जाता है पाठकों को ध्यान होगा कि कुछ समय पूर्व यू.के. और यूरोपीय देशों में सूडान रेड मिली लाल मिर्च जिसका आयात भारत से ही किया गया था से निर्मित सॉस व अन्य उत्पाद बाजार से वापस उठवा लिए गए थे जिनका मूल्य लाखों डॉलर था। कारण कि सूडान रेड कार्सीनो जेनिक पदार्थ है अर्थात जिससे कैंसर विकसित होने का खतरा रहता है।

पिसा हुआ धनिया :- पिसे हुए धनिये में गधे और घोड़े की लीद आटे का चोकर और धनिये के पौधे की डंडियों को भी पीस दी जाती है और इसमें स्टार्च का भी मिश्रण कर दिया जाता है।

छोटी इलायची :- इनमें से आवश्यक तेल पहले निकाल लिया जाता है जिससे इलायची की प्राकृतिक गुणवत्ता गिरती है या यह कीडों द्वारा खाई हुई हो सकती है।

लोंग :- लोंग बहुगुणकारी होते हैं परन्तु इनमें से विक्रय से पूर्व आवश्यक तेल निकाल लिया जाता है जिसका कारण इनके गुण न्यून ही रह जाते हैं।

दालचीनी :- दालचीनी के स्वाद और गंध से मिलती-जुलती केसिया की छाल की मिलावट एक आम बात है। दालचीनी में प्राकृतिक रूप से उपस्थित आवश्यक तेल छोटी इलायची और लौंग की भांति पहले ही निकाल लिया जाता है। इनके तेल बडे गुणकारी और बहुत ही मंहंगे होते हैं।

जावित्री :- जावित्री में मुम्बई की जावित्री और जंगली जावित्री की मिलावट की जाती है।

काली मिर्च :- यह तो सभी जानते है कि काली मिर्च में पपीते के बीजों की मिलावट की जाती है इसके अतिरिक्त फफूंद के प्रभाव को रोकने के लिए खनिज तेल की परत भी चढाई जाती है।

हींग :- पेड़ों से निकलने वाले गोर में हींग की गंध की मिलावट आम बात है इसके अतिरिक्त आटे की लोई में हींग की गंध मिलाकर भी हींग के रूप में इस मिलावटी मिश्रण का विक्रय किया जाता है।

4. अनाज और दालें :
कंकड़, पत्थर, कूडा- करकट आदि की मिलावट तो एक आम बात है। परन्तु कुछ व्यापारी गेहूं में कीड़ा लगे गेहूं का मिश्रण भी कर देते हैं अथवा झुर्रियां पड़े और सिकुड़े गेहूं का मिश्रण भी मिलावट की श्रेणी में आता है क्योंकि इन दानों का लसलसा पदार्थ कम हो जाता है और इनसे पीसा गया आटा कम और हल्की गुणवत्ता का होता है।
कई मिलें जो गेहूं का आटा बेचती है गेहूं में हल्की गुणवत्ता के सस्ते चावलों का मिश्रण भी कर देते हैं।

दालें :- दालों के रंग में रंगे पत्थरों की मिलावट एक आम बात है परन्तु अच्छी गुणवत्ता की दालों में हल्की गुणवत्ता की दालों और कृत्रिम रंगों जैसे मैटानिल यैलो और टारट्रेजीन आदि का मिश्रण भी किया जाता है।

अरहर दाल :- अरहर की दाल में केसरी दाल की मिलावट से उपभोक्ता परिचित है। केसरी दाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।

चावल :- अच्छी क्वालिटी के चावलों में वैसे ही दिखाई देने वाले हल्की क्वालिटी के चावलों की मिलावट की जाती है। टेरीकॉट हल्की क्वालिटी के चावलों की ऐसी किस्म है जो देखने में उच्च गुणवत्ता के चावलों जैसी ही दिखाई देती है।

5. मांस और मछली उत्पाद :
डिब्बाबंद या पैक किए हुए मांस और मछली में सूक्ष्मजीवियों की अधिकता हो सकती है जिनमें कई सूक्ष्मजीवियों की अधिकता हो सकती है जिनमें कई सूक्ष्मजीवी रोग उत्पन्न करने वाले भी होते है जैसे फ्रोजेन मीट में मिस्टीरिया की उपस्थिति। कच्चे मांस और मछली में रंग भी मिलाया हो सकता है। साथ ही इनमें उच्च स्तर के सूक्ष्मजीवी भी हो सकते हैं जैसे ई-कोली, सैलमोनैला, स्टैफीलोकोकस ऑरैन्स, क्लॉस्ट्रीडियम परफ्रिंजैस, बोटूलिनम बैक्टीरिया आदि। मांस और मछली में कई एंटीबायोटीक्स जैसे क्लोरमफैनिकॉल, स्ट्रेप्टोमाईसिन, टैट्रासाईक्लीन आदि भी हो सकते हैं।

6. चीनी, मधु, मिठाईयां और मीठी गोलियां :
चीनी :- चीनी के निर्माण में यदि लापरवाही बरती जाये तो इसमें सल्फर डाई आक्साइड की अधिक मात्रा हो सकती है जो हानिकारक है।

बूरा :- बूरा में सल्फर डाई ऑक्साइड की अधिक मात्रा होती है और इसमें कपड़े धोने का सोडा, चॉकपाउडर आदि की मिलावट हो सकती है।

शहद मधु :- इसमें गुड का शीरा मिला हो सकता है और सल्फा ड्रग्स सहित अन्य एन्टी बायोटिक्स हो सकते हैं।

मिठाईयां :- हलवाई के यहां बनने वाली मिठाईयों में कृत्रिम मीठे की मिलावट जैसे सैकरीन या अन्य कृत्रिम मिठास, कृत्रिम रंग, कृत्रिम दूध से निर्मित मावा, चांदी के वर्क के स्थान पर एल्यूमिनियम के वर्क, निम्र गुणवत्ता के मेवे आदि की मिलावट हो सकती है।

मीठी चूसने वाली गोलियां :- इनमें सीमित मात्रा से अधिक रंग, परिरक्षक पदार्थों की अधिक मात्रा और खनिज तेलों की कोटिंग मुख्य मिलावट के पदार्थ हो सकते हैं।

7. फलों के उत्पाद जैसे जैम, मुरब्बे, जैली, फ्रुटजूस और अन्य पेय पदार्थ :
इन सभी पदार्थो में सल्फर डाई ऑक्साइड, सॉर्बिक एसिड, बैन्जोइकएसिड आदि जैसे परिरक्षक पदार्थो की अधिक मात्रा कृत्रिम मिठास की उपस्थिति निर्धारित स्तर से अधिक मात्रा में कृत्रिम रंग कुछ ऐसे अनचाहे पदार्थों की मिलावट जिसकी अनुमति पी.एफ.ए. नहीं देता और कुछ अखाद्य स्टार्च की मिलावट भी की जाती है।

8. पेय पदार्थ पाउडर पेय पदार्थ आदि :
इनमें मिलावट के रूप में निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में रंगों की उपस्थिति निषेधित मिठास की अधिकता और ब्रोमिन उपचारित वनस्पतिक तेलों की मिलावट हो सकती है।

9. मिनरल वॉटर, बोतल बंद पेयजल , चॉकलेट्ïस, पान मसाला, पिस्ता, बादाम गिरी आदि :
मिनरल वॉटर तथा बोतलबंद पेयजल नकली हो सकते है जो पीएफए द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप न हों। दूसरे इनमें असुरक्षित जीवी और अधिक मात्रा में कीटनाशक हो सकते हैं। चॉकलेट्ïस में वनस्पतिक घी और कीडे भी हो सकते हैं। पान मसाला/मीठी सुपारी आदि में कृत्रिम मिठास की अधिक मात्रा हो सकती है और कृत्रिम भी मिलाये हो सकते है ये उत्पाद फफूंद से भी ग्रसित हो सकते हैं।

पिस्ता :- पिस्ता आजकल कटा हुआ मिलता है जिसे बर्र्फी तथा अन्य मिठाईयों पर चिपकाया जाता है। पिस्ते में मूंगफली को काटकर व हरे रंग से रंगकर इसकी मिलावट भी की जा सकती है।

चाय पत्ती :- चाय की पत्ती भी मिलावट की शिकार होती है। इसमें इस्तेमाल की जा चुकी पत्ती की मिलावट हो सकती है। चमड़े की छीलन को रंग देकर चाय की पत्ती में मिलाया जा सकता है। चाय की पत्ती की जगह अन्य पौधों की पत्तियों को भी रंग कर चाय में मिलावट की जा सकती है।

बादाम की गिरी :- आजकल बादाम की गिरी का खूब बढ़ा हुआ कारोबार है परन्तु जो गिरी बाजार में उपलब्ध है उसमें से बादाम के तेल की अधिक मात्रा पहले ही मशीनों की मदद से निकाली हुई होती है अत: जो बादाम गिरी हम और आप बाजार से खरीद कर इस्तेमाल करते हैं उसमें गुणकारी बादाम तेल बहुत ही कम होता है जिस कारण उसकी गुणवत्ता बहुत ही कम होती है।

उपरोक्त वर्णन से पाठकों को यह तो स्पष्टï हो ही गया होगा कि खाद्य वस्तुओं में शायद कुछ भी नहीं छूटा है जिसमें मिलावट का असर देखने को न मिलता हो यही कारण है कि आजकल जो कुछ हम खाते हैं उनसे पौष्टिïक तत्व उतनी मात्रा में हमें नहीं मिलते कि जितने बिना मिलावट के पदार्थों से मिल सकते हैं। इसलिए आजकल बहुत सी टॉनिक की गोलियां, कैपसूल और सिरप बनाये जाने लगे हैं जिनके सेवन से हम अपने शरीर को कृत्रिम पौष्टिïक पदार्थ उपलब्ध कराते हैं जो हमें आजकल के खाद्य पदार्थों से इसलिए उपलब्ध नहीं हो रहे क्योंकि व्यापारी वर्ग हद से अधिक मिलावट करने लग गए हैं।

जागरूकता और सतर्कता ये ही दो बाते हैं जिन्हें हमें अपने व्यवहार में लाना चाहिये और प्रयास करना चाहिये कि मिलावट करने वालों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया जाये। केवल कानून बना देने से स्थिति में सुधार संभव होता दिखाई नहीं देता।